Monday, 26 September 2016

!! शुभ संध्या/रात्रि वंदन.... जय माता दी..!!
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नवरात्रि शनिवार से प्रारम्भ होने के कारणा माता का वाहन अश्व (घोड़ा) है ः अश्व पर माता रानी आती हैं तो राजनीतिक उठापठक, व युद्ध की सम्भावना बनती है, जिस प्रकार घोड़ा न थकता है, न बैठता है उसी प्रकार शासक व प्रशासक को देवी का यह योग बैठने नही देगा..!!
हिन्दू त्यौहारों का महत्वपूर्ण पर्व नवरात्र 01 अक्टूर से प्रारम्भ होकर 10 अक्टूबर तक रहेंगे। इस बार प्रतिपदा तिथि दो दिन होने के कारण नवरात्र नौ दिन की बजाय 10 दिन रहेंगे। नवरात्र के नौ दिन देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा करने का विधान है
!! शुभ संध्या/रात्रि वंदन.... जय माता दी..!!
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नवरात्रि शनिवार से प्रारम्भ होने के कारणा माता का वाहन अश्व (घोड़ा) है ः अश्व पर माता रानी आती हैं तो राजनीतिक उठापठक, व युद्ध की सम्भावना बनती है, जिस प्रकार घोड़ा न थकता है, न बैठता है उसी प्रकार शासक व प्रशासक को देवी का यह योग बैठने नही देगा..!!
हिन्दू त्यौहारों का महत्वपूर्ण पर्व नवरात्र 01 अक्टूर से प्रारम्भ होकर 10 अक्टूबर तक रहेंगे। इस बार प्रतिपदा तिथि दो दिन होने के कारण नवरात्र नौ दिन की बजाय 10 दिन रहेंगे। नवरात्र के नौ दिन देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा करने का विधान है

Tuesday, 8 March 2016

रक्षा-कारक  शाबर मन्त्र
“श्रीरामचन्द्र-दूत हनुमान ! तेरी चोकी – लोहे का खीला, भूत का मारूँ पूत । डाकिन का करु दाण्डीया । हम हनुमान साध्या । मुडदां बाँधु । मसाण बाँधु । बाँधु नगर की नाई । भूत बाँधु । पलित बाँधु । उघ मतवा ताव से तप । घाट पन्थ की रक्षा – राजा रामचन्द्र जी करे ।
बावन वीर, चोसठ जोगणी बाँधु । हमारा बाँधा पाछा फिरे, तो वीर की आज्ञा फिरे । नूरी चमार की कुण्ड मां पड़े । तू ही पीछा फिरे, तो माता अञ्जनी का दूध पीया हराम करे । स्फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ।”

विधिः- उक्त मन्त्र का प्रयोग कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ही करें । प्रयोग हनुमान् जी के मन्दिर में करें । पहले धूप-दीप-अगरबत्ती-फल-फूल इत्यादि से पूजन करें । सिन्दूर लगाएँ, फिर गेहूँ के आटे का एक बड़ा रोट बनाए । उसमें गुड़ व घृत मिलाए । साथ ही इलायची-जायफल-बादाम-पिस्ते इत्यादि भी डाले तथा इसका भोग लगाए । भोग लगाने के बाद मन्दिर में ही हनुमान् जी के समक्ष बैठकर उक्त मन्त्र का १२५ बार जप करें । जप के अन्त में हनुमान् जी के पैर के नीचे जो तेल होता है, उसे साधक अँगुली से लेकर स्वयं अपने मस्तक पर लगाए । इसके बाद फिर किसी दूसरे दिन उसी समय उपरोक्तानुसार पूजा कर, काले डोरे में २१ मन्त्र और पढ़कर गाँठ लगाए तथा डोरे को गले में धारण करे । मांस-मदिरा का सेवन न करे । इससे सभी प्रकार के वाद-विवाद में जीत होती है । मनोवाञ्छित कार्य पूरे होते हैं तथा शरीर की सुरक्षा होती है ।

Friday, 26 February 2016

गायत्री मंत्र ः विभिन्न देवी देवताओं व ग्रहों के गायत्री मंत्र

चन्द्र गायत्री- ॐ अमृतंग अन्गाये विधमहे कलारुपाय धीमहि,तन्नो सोम प्रचोदयात"|
मंगल गायत्री- "ॐ अंगारकाय विधमहेशक्तिहस्तायधीमहितन्नो भोम :प्रचोदयात"|
बुध गायत्री- "ॐ सौम्यरुपाय विधमहे वानेशाय चधीमहितन्नोसौम्य प्रचोदयात"|
गुरु गायत्री- "ॐ अन्गिर्साय विधमहे दिव्यदेहायधीमहिजीव:प्रचोदयात "|
शुक्र गायत्री- "ॐ भ्र्गुजाय विधमहे दिव्यदेहायतन्नो शुक्र:प्रचोदयात"|
शनि गायत्री- "ॐ भग्भवाय विधमहे मृत्युरुपायधीमहितन्नो सौरी:प्रचोदयात "|
राहू गायत्री- "ॐ शिरोरुपाय विधमहे अमृतेशायधीमहितन्नो राहू:प्रचोदयात"|
केतु गायत्री- "ॐ पद्म्पुत्राय विधमहे अम्रितेसाय धीमहि तन्नोकेतु:प्रचोदयात"|
ब्रम्हा गायत्री- "ॐ वेदात्मने च विधमहे हिरंगार्भाय तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात "|
विष्णु गायत्री- "ॐ नारायण विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात"|
शिवगायत्री- ॐ महादेवाय विधमहेरुद्रमुर्तय धीमहि तन्नोशिव:प्रचोदयात "|
कृष्ण गायत्री- ॐ देव्किनन्दनाय विधमहे,वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात "|
राधागायत्री-वृष भानु: जायै विधमहे,क्रिश्न्प्रियाय धीमहि तन्नो राधा :प्रचोदयात "|
लक्ष्मी गायत्री-ॐमहालाक्ष्मये विधमहेविष्णु प्रियाय धीमहि तन्नोलक्ष्मी:प्रचोदयात|
तुलसी गायत्री- ॐ श्री तुल्स्ये विधमहे,विश्नुप्रियाय धीमहि तन्नो वृंदा:प्रचोदयात "|
इन्द्र गायत्री- ॐ सहस्त्र नेत्राए विधमहे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इन्द्र:प्रचोदयात "|
सरस्वती गायत्री- ॐ वाग देव्यैविधमहे काम राज्या धीमहि तन्नो सरस्वती :प्रचोदयात "|
दुर्गा गायत्री- ॐ गिरिजाये विधमहे,शिवप्रियाय धीमहि तन्नो दुर्गा :प्रचोदयात "|
हनुमान गायत्री- ॐअन्जनिसुतायविधमहे वायु पुत्राय धीमहितन्नो मारुती :प्रचोदयात "|
पृथ्वी गायत्री- ॐपृथ्वी देव्यैविधमहेसहस्र मूरतयैधीमहि तन्नो पृथ्वी :प्रचोदयात "|
राम गायत्री- ॐदशारथाय विधमहे सीता वल्लभाय धीमहि तन्नो राम :प्रचोदयात "|
सीता गायत्री- ॐ जनक नंदिन्ये विधमहे भुमिजाय धीमहि तन्नो सीता :प्रचोदयात "|
यम् गायत्री- ॐ सुर्यपुत्राय विधमहे,महाकालाय धीमहि तन्नो यम् :प्रचोदयात "|
वरुण गायत्री- ॐ जल बिम्बाय विधमहे नील पुरु शाय धीमहि तन्नो वरुण :प्रचोदयात "|
नारायण गायत्री- ॐनारायण विधमहे,वासुदेवाय धीमहि तन्नो नारायण :प्रचोदयात "|
हयग्रीव गायत्री- ॐवाणीश्वरायविधमहे,हयग्रीवाय धीमहि तन्नो हयग्रीव :प्रचोदयात "|
हंसा गायत्री- ॐपरम्ह्न्सायविधमहेमहा हंसाय धीमहि तन्नोहंस:प्रचोदयात "|

Saturday, 20 February 2016

!! शुभ प्रभात....शुभ दिवस..!!
!! जय गायत्री माता.!!
!! जय सूर्यदेव
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गायत्री मंत्र:-
!!ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
अर्थ ः
उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।

Saturday, 18 April 2015

शनि की साढ़े साती या ढईया : शनि के उपाय

!!शुभ प्रभात वंदन  दोस्तों ........जय माता दी!!
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शनि की साढ़े साती या ढईया : शनि के उपाय :
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शनि देव के प्रकोप से हम सभी भयभीत रहते हैं। शनि की साढ़े साती हो या ढईया इनका नाम सुनते ही घबराहट सी महसूस होने लगती है। लाल किताब में शनि के प्रकोप से बचने के लिए आसान उपाय दिये गये हैं। इस लेख में इन्हीं उपायों के बारे में जिक्र किया जा रहा है।
आमतौर पर वैदिक ज्योतिष में जब ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति  मे होते  है तब उनका उपाय किया जाता है।परन्तु  ग्रह चाहे शुभ स्थिति में हो या अशुभ उसका उपाय करने से जहाँ उसके फल में स्थायित्व रहता  हें, वही दूसरी तरफ अशुभ ग्रह का उपाय करने से उसके विपरीत प्रभाव में कमी आती है।
कुण्डली में शनि जिस भाव में है उस भाव के अनुसार हमें किस प्रकार का उपाय करना चाहिए/
आपकी कुण्डली में शनि प्रथम भाव में स्थित हों तो आपको इस प्रकार के उपाय करने चाहिए।
1) जमीन पर तेल गिराएं.
2) 48 वर्ष की आयु तक मकान न बनाएं.
3) रूके हुये पानी में काला सुरमा दबाएं.
4) बन्दर पालें.
5) मांगने वाले को लोहे की अगींठी, तवा, चिमटा इत्यादि दान में दें.
6) वट बृक्ष की पेड़ की जड़ में दूध डालकर उसकी गीली मिट्टी का तिलक माथे पर लगाएं.

द्वितीय भाव में स्थित शनि के उपाय
1) भूरे रंग की भेंस पालें.
2) साँप को दूध पिलाएं.
3) मन्दिर में उड़द काली मिर्च, काले चने व चन्दन की लकडी दान में दें.
4) प्रतिदिन मन्दिर में दर्शन करें.

तृतीय भाव में स्थित शनि के उपाय (Remedies of Saturn in third house)

1) अलग-अलग रंग के (सफेद, लाल, काला, ) तीन कुत्ते पालें.
2) मकान की दहलीज में लोहे की कील लगाएं.

चतुर्थ भाव में स्थित शनी के उपाय

1) साँप को दूध पिलाएं.
2) मछ्ली को चावल, दाना आदी डालें
3) डा़क्टरी का कार्य करें और इलाज के तौर खुश्क दवा दें.
4) रात को दूध न पिये.
5) श्रमिक वर्ग से अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखें.
6) भैस पालें.
7) दवाईयों व्यापार करें.

पंचम भाव में स्थित शनी के उपाय

1) 48 वर्ष आयु से पहले मकान न वनाएं.
2) मन्दिर में बादाम चढाए़ व उनमें से आधे वाप़स लाकर घरमें रखें.
3) पुत्र के जन्म दिन पर मिठाई न बाटें.
4) कुत्ता पालें.
5) काले सुरमें को बहते जल में प्रवाहित करें.

छटे भाव में स्थित शनि के उपाय
1) भूरे व काले रंग का कुत्ता पालें.
2) सरसो का तेल मिट्टी या शीशी के बर्तन में बन्द करके तालाब के पानी के अन्दर दबाएं.
3) साँप को दूध पिलाएं.
4) रात के समय किया गया काम लाभदायक होगा.

सप्तम भाव में स्थित शनि के उपाय
1) 22 वर्ष की आयु से पहले विवाह न करें.
2) देशी खाण्ड मिटटी के बर्तन में भरकर श्मशान में दवाएं.
3) पत्नी के बालों में सोना लगाएं.
4) किसी भी रिश्तेदार से साझें में कार्य न करें.
5) पत्नी की सलाह से काम करें.

अष्टम भाव में स्थित शनि के उपाय
1) शराब, अण्डे, मांस से परहेज करें.
2) मकान न खरीदें.
3) भारी मशीनरी का व्यबसाय न करें.
4) लोहे की अंगीठी, तवा, चिमटा आदि दान करें.
5) भुमि पर नगें पाँव ना चलें.
6) आठ किलो साबुत उड़त चलते पानी में प्रवाहित करें.

नवम भाव में स्थित शनि के उपाय

1) शराब, अण्डा, मांस का सेवन ना करें.
2) चलते पानी में चावल प्रवाहित करें.
3) पिता, दादा के साथ रहें.
4) बूढे ब्राह्मण को बृहस्पति की वस्तुएँ दान करें .
5) छत पर इंधन (चूल्हा) न जलाएँ.
6) सोना, चांदी व कपडे़ का व्यबसाय लाभ देगा.

द्शम भाव में स्थित शनि के उपाय (Remedies of Saturn in tenth house)

1) रात को दूध ना पिये.
2) सिर ढक कर रखें .
3) दस अन्धों को भोजन करायें.
4) शराब, अण्डा, मांस का सेवन ना करें.5) मन्दिर में दर्शन हेतु जाते रहें.

एकादश भाव में स्थित शनि के उपाय

1) शराब, अण्डा, मांस का सेवन ना करें.
2) 48 वर्ष आयु के पश्चात मकान बनाऎं.
3) जमीन पर तेल गिराऎं.
4) मकान में दक्षिण दिशा की ओर दरवाजा ना रखें.
5) शुभ काम करने से पहले मिट्टी का घडा़ पानी से भरकर रखें.


द्वादश भाव में स्थित शनि के उपाय
1) झूठ बोलने से बचे.
2) मकान की पिछली दीवार में रोशनदान ना बनाएं.
3) शराब, अण्डा, मांस से परहेज करें.
4) धर्म, कर्म करते रहें.

शनि के उपरोक्त उपाय  करने से तुरन्त लाभ मिलता हैं.
ध्यान रखें:
1) एक समय में केवल एक ही उपाय करें.
2) उपाय कम से कम 40 दिन या 43 दिनो तक करें.
3) उपाय में नागा ना करें यदि किसी कारणवश नागा हो तो उपाय फिर से प्रारम्भ करें.
4) उपाय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक करें.
5) उपाय खून का रिश्तेदार ( भाई, पिता, पुत्र इत्यादि) भी कर सकता है.
!!ज्योतिषविद  :
देवल दुबलिश, मेरठ !!

केतु के उपाय

!!शुभ प्रभात वंदन  दोस्तों ........जय माता दी!!
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इस लेख के माध्यम से केतु ग्रह के प्रत्येक भाव मेँ स्थित होने पर उसके उपाय की जानकारी दी गई है. प्रत्येक व्यक्ति जिनका केतु जिस-2 भाव में स्थित है वह यहाँ दी गई सूची के आधार पर उपाय कर सकता है.
प्रथम भाव में स्थित केतु के उपाय
1)
बन्दर को गुड़ खिलाएं2) काला, सफेद दो रंग का कम्बल मन्दिर में दान करें.3) दोना पावों के अंगुठे में चाँदी या सफेद धागा बाधँ कर रखें.4) ब्रह्मचर्य का पालन करें.5) केसर का तिलक लगाएं.

द्वितीय भाव में स्थित केतु के उपाय
1)
अपने चरित्र को उत्तम बनाए रखें.2) माथे पर केसर का तिलक लगाएं.3) मन्दिर में प्रतिदिन दर्शन के लिए जाएं.
तृतीय भाव में स्थित केतु के उपाय
1)
कानो में सोना पहनें.2) वृद्ध् की सेवा करें.3) माथे पर केसर का तिलक लगाएं.4) बहते पानी में गुड़ प्रवाहित करें.5) भाई बन्धुओं से अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखें.6) जीभ पर केसर रखें.
चतुर्थ भाव में स्थित केतु का उपाय
1)
दूध में सोना बुझा कर पीएं.2) पीले रंग के नींबु चलते पानी में प्रवाहित करें.3) कुत्ता पालें.4) शरीर पर चाँदी धारण करें.
पचंम भाव में स्थित केतु के उपाय
1)
दूध, चावल, देसी खाण्ड , सौंफ दरिया में प्रवाहित करें.2) पिता व दादा की सेवा करें.3) पितरो का श्राद्ध करें.4) कन्याओं का आशीर्वाद लें.5) केसर का तिलक लगाएं.6) ब्राह्मण को बृहस्पति की वस्तुऎं दान करें.
छटे भाव में स्थित केतु के उपाय
1)
कुत्ता पालें.2) काला, सफेद कम्बल मन्दिर में दान करें.3) बाएं हाथ में सोने का छ्ल्ला पहने.4) दूध में केसर मिलाकर पीयें.
सप्तम भाव में स्थित केतु के उपाय
1)
मीठी वाणी का प्रयोग करें.2) अपने वचन पालन करें.
अष्टम भाव में स्थित केतु का उपाय
1)कुत्ता पालें.
2)
काला, सफेद कम्बल मन्दिर में दान करें
.3) कानो में सोना पहनें.4) अपने चरित्र को उत्तम बनाएं रखें.

नवम भाव में स्थित केतु का उपाय
1) कानो में सोना पहने घर में सोना रखें.2) कुत्ता पालें.3) पिता, दादा के साथ रहें उनकी सेवा करें.
दशम भाव में स्थित केतु के उपाय
1)
चांदी के बर्तन में शहद भर कर घर में रखें.2) 48 वर्ष से पहले मकान ना बनाएं.3) व्यभिचार से बचें.4) अपने चरित्र को उत्तम बनाएं रखें.
एकादश भाव में स्थित केतु के उपाय
1)
दूध से सोना बुझा कर पियें.2) काले रंग का कुत्ता पालें.3) रात में स्त्री के सिरहाने मूली रख कर सुबह मन्दिर में दान करें.4) दूध में के डालकर पिएं.
द्वादश भाव में स्थित केतु के उपाय 
 1) कुत्ता पालें, यदि किसी कारणवश कुत्ता मर जाए तो दोबारा कुत्ता पालें.इस प्रकार लाल किताब के अनुसार केतु के उपाय  करने से तुरन्त लाभ मिलता हैं.
नोट 1) एक समय में केवल एक ही उपाय करें.2) उपाय कम से कम 40 दिन और अधिक से अधिक 43 दिनो तक करें.3) उपाय में नागा ना करें यदि किसी करणवश नागा हो तो फिर से प्रारम्भ करें.4) उपाय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक करें.5) उपाय खून का रिश्तेदार ( भाई, पिता, पुत्र इत्यादि) भी कर सकता है.
ज्योतिषविद  :
!!देवल दुबलिश, मेरठ  ।!!