Saturday, 10 January 2015

Aapka 2015 : Ek Najar BHAVISHYFAL

भविष्यफल 2015 - 2015 राशिफल 2015 राशिफल

आपको नए साल की योजनाओं को बनाने में सहायता करेगा और आपको सफलता व समृद्धि की ओर ले जाएगा।

राशिफल 2015 के साथ हम एक बार फिर आपके सामने हाज़िर हैं। यह भविष्यफल 2015 वैदिक ज्योतिष पर आधारित है।

नए साल के आने से पहले ही हम योजना बनाने लगते हैं कि आने वाले साल में हम ये काम करेंगें, वो काम करेंगे, ऐसा करेंगे, वैसा करेंगे आदि आदि। कुछ काम ऐसे भी होते हैं जिन्हेंआप पिछले साल नहीं कर पाए हैं। ऐसे में आपकी इच्छा यही रहती है कि आने वाले साल में आप उन कामों को अंजाम तक पहुँचा पाएँ। कई बार होता भी ऐसा ही है कि लाख कोशिशों के बावजूद भी कोई काम नहीं होता, लेकिन नया साल उस काम की पूर्णाहुती करवा देता है। इन सबके पीछे ग्रह-गोचर का बहुत बड़ा हाथ होता है।

यदि आपके मन में भी साल 2015 को लेकर तरह-तरह के सवाल हैं तो आपके सभी सवालों के जवाब राशिफल 2015 में मिल जाएंगे। 2015 का राशिफल न केवल आपके हर क्षेत्र पर ज्योतिषीय प्रकाश डालेगा, बल्कि यदि कोई समस्या भी हुई तो इसमें उसका सामाधान भी होगा। इस भविष्यफल 2015 के माध्यम से आप 2015 की दिशा जानकर अपने आने वाले समय का अंदाज़ा लगा सकेंगे और उसके अनुसार सही योजना बनाकर आप अपने आने वाले समय को और भी बेहतर बना पाएंगे।

मेष राशिफल 2015 के अनुसार----------------------------

राशिफल 2015 के अनुसार इस साल बृहस्पति महाराज की भरपूर कृपा आप पर रहने वाली है। आपका भाग्येश आपके चतुर्थ और पंचम भाव में रहेगा। अत: वर्ष के प्रथम भाग में घरेलू जीवन सुखी रहेगा। यदि विदेश जाने के लिए प्रयासरत थे, तो उसमें सफलता मिलने वाली है। घर या गाड़ी ख़रीदने के इच्छुक हैं तो प्रयास में और तेज़ी लाएँ, सफलता ज़रूर मिलेगी। भविष्यफल 2015 के अनुसार वर्ष का दूसरा भाग प्रेम-प्रसंगों और वैवाहिक मामलों के लिए ग़ज़ब का रहने वाला है। शादी हो चुकी है और संतान के इच्छुक हैं, तो ऊपर वाला आपकी मुराद पूरी करने को तैयार है।

व्यापारीगण अपने व्यापार-व्यवसाय को बढ़ाने के लिए धन ख़र्च करेंगे। कोई बेहतर योजना बनाकर आप कुछ नया कर सकते हैं। वरिष्ठ लोगों का सहयोग मिलेगा। वर्ष 2015 में धन लाभ के सुंदर योग बन रहे हैं। लेकिन शनि महाराज की अष्टम भाव में स्थिति और राहु को छठे भाव में देखते हुए घर-परिवार और स्वास्थ्य को लेकर निश्चिन्त रहना उचित नहीं होगा, बल्कि समय-समय पर इन मुद्दों में चिंतन ज़रूरी होगा।

बारहवें भाव के केतु महाराज संकेत कर रहे हैं कि उन्मादी होकर काम करने और परेशानियों में पड़ने से अच्छा है कि कभी-कभी दूसरों की सलाह पर अमल भी कर लेना चाहिए। 2015 राशिफल के अनुसार विद्य़ार्थियों को उनकी मेहनत के अनुसार फल मिलता रहेगा।

मेष राशिफल 2015 के अनुसार उपाय:---- चांदी का चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें।

वृष राशिफल 2015-----------------------------के अनुसार

साल 2015 में बृहस्पति देव तो आपके ऊपर काफ़ी प्रसन्न नज़र आ रहे हैं। उनकी कृपा से आप सही दिशा में कार्य करते हुए, न केवल अपने कामों को सही अंजाम तक पहुँचा पाएंगे, बल्कि बड़ी मात्रा में मान-सम्मान और प्रशंसा भी प्राप्त करेंगे। राशिफल 2015 के अनुसार सातवें भाव में शनि की उपस्थिति कभी-कभार आपकी आजीविका में व्यवधान ड़ालने का फल दे सकती है, साथ ही निजी जीवन में भी समरसता की कमी देखने को मिल सकती है। लेकिन भविष्यफल 2015 के दृष्टिकोण से आप व्यवधानों को पार कर विजेता बनने में सफल रहेंगे। 2015 राशिफल में प्रेम प्रसंगों की बात करें तो पंचम में राहु की उपस्थिति संकेत कर रही है कि प्यार में सच्चाई और वफ़ा बहुत ज़रूरी होगी। यदि रुपया-पैसा, धन-दौलत आदि के बारे में बात की जाय तो साल बढ़िया रहने वाला है। हाँलाकि राशिफल संकेत करता है कि कुछ घरेलू उपकरण जैसे कि वॉशिंग मशीन और फ़्रीज आदि पर कुछ ख़र्चे करने पड़ सकते हैं। अगर विद्यार्थियों की बात करें भविष्यफल 2015 के अनुसार उन्हें भी कुछ अप्रत्याशित परिणाम देखेने को मिल सकते हैं।

वृष राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: काली गाय की सेवा करना शुभ रहेगा।
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मिथुन राशिफल 2015---------के अनुसार--------------------------

राशिफल 2015 के अनुसार यह साल आपके लिए बहुत सारे शुभ परिणामों का पिटारा भरकर लाया है। यदि आपकी योजना अपने परिजनों के लिए कुछ विशेष करने की है तो आपका प्रयास रंग लाएगा। इस वर्ष आपको यश और धन दोनो मिलने के योग बन रहे हैं। 2015 राशिफल कहता है कि आपका स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। यदि कोई पुरानी बीमारी है तो उसमें भी आपको कमी होती नज़र आएगी। लेकिन प्रेम-प्रसंगों के लिए भी लगभग पूरा वर्ष ही अच्छा रहेगा। यदि आप नौकरी-पेशा हैं और कुछ बदलाव करने की सोच रहे हैं, तो बेहतरी के सुंदर योग बन रहे हैं। हाँ, व्यवसायियों को कुछ एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ सकती है, लेकिन याद रखें कि मेहनत का फल मीठा होता है, अत: मेहनत से बिल्कुल न घबराएँ। भविष्यफल 2015 के अनुसार विद्यार्थियों को भी शुभ परिणाम मिलते रहेंगे।

मिथुन राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: कन्याओं की सेवा करना आपके लिए शुभ रहेगा।
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कर्क राशिफल 2015-----------------------के अनुसार-------

कई मामलों में यह साल आपके लिए कमाल का रह सकता है। राशिफल 2015 में संकेत हैं कि यदि आपकी उम्र विवाह की हो चली है, तो इस साल शहनाइयाँ गूँज सकती हैं। घर-परिवार में भी शहनाइयाँ गूँजने के योग दिख रहे हैं। प्रेम-प्रसंगों के मामलों में हठ करना ठीक नहीं रहेगा। भविष्यफल 2015 के अनुसार काम-धंधे के लिए भी साल बेहतर सिद्ध होने वाला है। साल 2015 में नौकरी में प्रमोशन की भी सम्भावनाएँ हैं। राशिफल २०१५ के अनुसार काम धंधे के सिलसिले में यात्राएँ होंगी, हालांकि कुछ यात्राएँ व्यर्थ की भी रह सकती हैं। इस साल धन की स्थिति बेहतर नज़र आ रही है, लेकिन आँख मूंद कर निवेश करना ठीक नहीं रहेगा। स्वास्थ में थोड़े बहुत उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। 2015 राशिफल के अनुसार विद्यार्थियों के लिए भी यह साल शुभ रहने वाला है।

कर्क राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: मंदिर में बादाम दान करना आपके लिए शुभ रहेगा।
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सिंह राशिफल 2015--------------------------------के अनुसार

भविष्यफल 2015 कहता है कि यह साल आपके लिए मिला-जुला रहेगा। वर्ष के प्रथम भाग में बृहस्पति आपके बारहवें भाव में है और शनि चतुर्थ में, अत: आपको कुछ परेशानियों से रू-ब-रू होना पड़ सकता है।

राशिफल 2015 के दृष्टिकोण से इस समय आप अपने परिजनों के किसी व्यवहार के चलते दुखी हो सकते हैं, लेकिन साल का दूसरा भाग अपेक्षाकृत अच्छे परिणाम देगा। साल २०१५ में आपकी परेशानियाँ धीरे-धीरे कम होने लगेंगी। और आप अपने कुछ विशेष योजनाओं के चलते परिस्थितियों पर नियंत्रण पा लेंगे। 2015 राशिफल कहता है कि इस साल आप धर्म-कर्म में संलग्न होकर काफ़ी बेहतर अनुभव करेंगे।

सिंह राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: दूध और चावल मिलाकर किसी गाय को खिलाना आपके लिए शुभ रहेगा।
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कन्या राशिफल 2015-----------------के अनुसार----------------

साल के पहले भाग में बृहस्पति की लाभ भाव में उपस्थिति यह दर्शा रही है कि आपको कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। राशिफल 2015 के अनुसार घर-परिवार के लोग भी ख़ुशहाल होंगे, लेकिन राहु की प्रथम भाव में उपस्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य का ख़्याल रखना बहुत ज़रूरी होगा। भविष्यफल 2015 के दृष्टिकोण से प्रेम या शादी और संतान सभी के लिए साल का पहला भाग काफी बेहतर रहने वाला है। राशिफल २०१५ की दृष्टि से काम धंधे व शिक्षा के लिए भी साल का पहला भाग शुभ है, लेकिन साल के दूसरे भाग में हर मामले में सावधानी ज़रूरी होगी। भविष्यफल 2015 कहता है कि आपके ख़र्चे बढ़ सकते हैं और स्वास्थ्य भी बीच-बीच में ढीला रह सकता है। अत: संयम और समझदारी से काम लेना ज़रूरी होगा।

कन्या राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: नियमित रूप से पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना शुभ रहेगा।
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तुला राशिफल 2015------------------------के अनुसार------

2015 के राशिफल की दृष्टि से सामान्य तौर पर यह साल आपके लिए बढ़िया रहेगा। पारिवारिक जीवन की बात करें, तो शनि प्रभाव के कारण कुछ छोटी-मोटी विसंगतियाँ सम्भव हैं। लेकिन कुल मिलाकर पारिवारिक शांति बनी रहेगी। भविष्यफल 2015 के अनुसार यह साल स्वास्थ्य के लिहाज़ से भी अच्छा रहने वाला है। यदि घर या गाड़ी ख़रीदने के मूड में हैं तो कश्मकश की स्थिति से बाहर निकलिए। राशिफल 2015 के दृष्टिकोण से साल का जो दूसरा भाग है वो आपके प्रेम-प्रसंग व निजी जीवन में गुलाबी ख़ुश्बू घोलने का संकेत कर रहा है। राशिफल 2015 के अनुसार इस साल आप अपने काम-धंधें में कुछ विशेष करने वाले हैं। पदोन्नति की भी सम्भावना है। लाभ के अवसर भी मज़बूत होंगे। लेकिन भविष्यफल 2015 के अनुसार दूसरे भाव में स्थित शनि के कारण ख़र्चे भी ज़बरदस्त होंगे। विद्यार्थियों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे।

तुला राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: माथे पर केसर का तिलक लगाना आपके लिए शुभ रहेगा।
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वृश्चिक राशिफल 2015---------------------के अनुसार--------------------------------

भविष्यफल 2015 के दृष्टिकोण से इस वर्ष अधिकांश ग्रह आपका पक्ष लेते नज़र आ रहे हैं, अत: साल काफ़ी बेहतर रहने वाला है। केवल शनि की स्थिति ही ऐसी है, जो बीच-बीच में थोड़ा बहुत रंग में भंग डाल सकती है। फिर भी परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। राशिफल 2015 के अनुसार प्रेम-प्रसंगों के लिए वर्ष अनुकूल है, लेकिन प्रथम भाव के शनि के कारण वैवाहिक जीवन में कुछ व्यवधान रह सकता है। साथ ही यह स्थिति कुछ स्वास्थ्य सम्बंधी परेशानियाँ भी दे सकती है। 2015 राशिफल के दृष्टिकोण से कार्यक्षेत्र के लिए भी समय अच्छा है। आर्थिक मामलों में भी बेहतरी आने के योग हैं। जबकि विद्यार्थियों को मेहनत के बाद अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं। व्यावसायिक शिक्षार्थियों के लिए साल का दूसरा भाग और अच्छा रहेगा।

वृश्चिक राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: बंदरों की सेवा करें और मांस मदिरा से परहेज करें तो व्यवधान दूर होंगे।
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धनु राशिफल 2015------------------------के अनुसार--------------------------------

वर्ष के आरम्भ में बृहस्पति आठवें भाव में है जो कि अधिक अनुकूल नहीं है। ऊपर से शनि बारहवें भाव में है अत: राशिफल 2015 की दृष्टि से आर्थिक मामलों कुछ कठिनाई रह सकती है। आपको तो पता ही है कि अर्थव्यवस्था के बिगड़ने से कई चीज़ें प्रभावित होती हैं, अत: अनुकूल परिणाम पाने के लिए कठिन प्रयास करना पड़ेगा। राशिफल २०१५ में संकेत हैं कि, आप ऐसा भी महसूस कर सकते हैं कि घर परिवार के लोग पहले जैसे नहीं रहे। 2015 राशीफल के अनुसार मन में असुरक्षा की भावना जाग सकती है जिससे स्वास्थ्य पर भी फ़र्क पड़ेगा। भविष्यफल 2015 के दृष्टिकोण से प्रेम संबंधों में भी असंतोष रह सकता है। लेकिन साल के दूसरे भाग में आपकी मुरादें पूरी होने लगेंगी। खुशियाँ धीरे-धीरे वापस आने लगेंगी। राशिफल 2015 के अनुसार आमदनी में सुधार होगा और विद्यार्थियों को भी अच्छे परिणाम मिलेंगे।

धनु राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: घी और आलू मंदिर में दान करना आपके लिए शुभ रहेगा।
और भी...
मकर राशिफल 2015
मकर राशिफल 2015

राशिफल 2015 के मुताबिक़ वर्ष का प्रथम भाग आपके लिए काफ़ी अच्छा रहेगा। आपकी बेहतरीन योजनाएँ आपको सफलता दिलाती रहेंगी। घर परिवार में भी रौनक जगमगाएगी। राशिफल २०१५ के दृष्टि से काम धंधे में अनुकूलता बनी रहेगी। आर्थिक स्थिति भी संतोषप्रद रहने वाली है। भविष्यफल 2015 के अनुसार यदि उम्र विवाह की हो चली है तो साल का पहला भाग इस मामले में मददगार सिद्ध हो सकता है। भविष्यफल 2015 के दृष्टिकोण से विद्यार्थी भी अपनी सफलता पर खुश होंगें लेकिन राशिफल 2015 के अनुसार वर्ष के दूसरे भाग में जीवन की डगर कुछ कठिन हो सकती है। 2015 राशिफल के दृष्टि से उस समय बृहस्पति अष्टम भाव में होगा, फलस्वरूप आर्थिक कठिनाइयों के कारण चीज़ें कुछ दूर होती नज़र आएंगी। अत: हर मामले में सावधानी से काम लेना होगा, साथ ही निवेशादि सावधानी पूर्वक करना उचित रहेगा।

मकर राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: हर चौथे महीने 6 जटा सहित नारियल पानी में बहाना आपके लिए शुभ रहेगा।
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कुम्भ राशिफल 2015-----------------------के अनुसार---------

भविष्यफल 2015 के दृष्टिकोण से यह साल आपके लिए मिले जुले परिणाम देने वाला रहेगा। राशिफल 2015 के अनुसार साल के पहले भाग में परिजनों से कुछ मनमुटाव रह सकता है, इसके पीछे की वजह आपकी कटुभाषा भी हो सकती है, अत: जहाँ तक सम्भव हो मृदुभाषी बनने का प्रयास करें। 2015 राशिफल के मुताबिक़ किसी पारिवारिक व्यक्ति के स्वास्थ्य को लेकर आप चिंतित रह सकते हैं। वैसे आपका स्वास्थ्य ठीक-ठाक रहने की उम्मीद है। कोर्ट-कचहरी से सम्बंधित कुछ मामलों में उलझाव रह सकता है। लेकिन राशिफल २०१५ के दृष्टि से साल के दूसरे भाग में प्रेम-संबंधों में बेहतरी आएगी। वैवाहिक जीवन में ख़ुशहाली रहेगी। कार्यक्षेत्र में तरक़्क़ी होगी। आमदनी और विद्या में भी सुधार आएगा।

कुम्भ राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: पुजारी को पीले कपड़े दान करना आपके लिए शुभ रहेगा।
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मीन राशिफल 2015--------------------के अनुसार-----------------------------

साल की शुरुआत काफ़ी बेहतर ढंग से होने वाली है। भविष्यफल 2015 के अनुसार घर-परिवार में कोई शुभ कृत्य हो सकता है। साल 2015 में कुछ सदस्यों का बरताव आपके मन को ठेस दे सकता है। साथ ही लग्न पर केतु की उपस्थिति को देखते हुए आपको अपने स्वास्थ्य का ख़याल रखना भी ज़रूरी होगा।
ऐसे में खान-पान पर संयम रखना ज़रूरी होगा।
राशिफल 2015 कहता है कि वाहन आदि सावधानी से चलाएँ। राशिफल २०१५ की दृष्टि से प्रेम संबध के मामले में तो समय को अच्छा कहा जाएगा, लेकिन सप्तम में राहु की उपस्थिति दाम्पत्य जीवन के लिए कम ठीक कही गई है; अत: इस वर्ष प्यार और विश्वास की ज़रूरत बनी रहेगी। 2015 राशिफल के अनुसार बेहतर नौकरी मिल सकती है, लेकिन मेहनत और ज़िम्मेदारियाँ बढ़ सकती हैं। लाभ के बढ़ने के भी योग हैं। शिक्षा के लिए समय अनुकूल रहेगा, लेकिन इस साल के दूसरे भाग में कुछ समस्याएँ सामने आ सकती हैं।

मीन राशिफल 2015 के अनुसार उपाय: मंदिर में चावल, गुड़ और चने की दाल भेंट करें।-------------------

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Saturday, 18 October 2014

Dipawli Poojan Vidhi

माता लक्ष्मीजी के पूजन की सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार होना चाहिए। इसमें लक्ष्मीजी को कुछ वस्तुएँ विशेष प्रिय हैं। उनका उपयोग करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इनका उपयोग अवश्य करना चाहिए। वस्त्र में इनका प्रिय वस्त्र लाल-गुलाबी या पीले रंग का रेशमी वस्त्र है।

माताजी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय है। फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े प्रिय हैं। सुगंध में केवड़ा, गुलाब, चंदन के इत्र का प्रयोग इनकी पूजा में अवश्य करें। अनाज में चावल तथा मिठाई में घर में बनी शुद्धता पूर्ण केसर की मिठाई या हलवा, शिरा का नैवेद्य उपयुक्त है। 

प्रकाश के लिए गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल इनको शीघ्र प्रसन्न करता है। अन्य सामग्री में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र का पूजन में उपयोग करना चाहिए।

तैयारी 
चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजनकर्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें। कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है।

दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें व दूसरे में तेल। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। इसके अतिरिक्त एक दीपक गणेशजी के पास रखें।

मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं। गणेशजी की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। नवग्रह व षोडश मातृका के बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।

इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी। सबसे ऊपर बीचोंबीच ॐ लिखें। छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें। थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था करें- 1. ग्यारह दीपक, 2. खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान, 3. फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।

इन थालियों के सामने यजमान बैठे। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे।
diwali puja vidhi in hindi
FILE

चौकी 
(1) लक्ष्मी, (2) गणेश, (3-4) मिट्टी के दो बड़े दीपक, (5) कलश, जिस पर नारियल रखें, वरुण (6) नवग्रह, (7) षोडशमातृकाएं, (8) कोई प्रतीक, (9) बहीखाता, (10) कलम और दवात, (11) नकदी की संदूकची, (12) थालियां, 1, 2, 3, (13) जल का पात्र, (14) यजमान, (15) पुजारी, (16) परिवार के सदस्य, (17) आगंतुक।

पूजा की संक्षिप्त विधि
सबसे पहले पवित्रीकरण करें।

आप हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।

ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें-

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब आचमन करें
पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ केशवाय नमः
और फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ नारायणाय नमः
फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ॐ वासुदेवाय नमः

फिर ॐ हृषिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को धो लें। पुनः तिलक लगाने के बाद प्राणायाम व अंग न्यास आदि करें। आचमन करने से विद्या तत्व, आत्म तत्व और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है तथा तिलक व अंग न्यास से मनुष्य पूजा के लिए पवित्र हो जाता है।

आचमन आदि के बाद आंखें बंद करके मन को स्थिर कीजिए और तीन बार गहरी सांस लीजिए। यानी प्राणायाम कीजिए क्योंकि भगवान के साकार रूप का ध्यान करने के लिए यह आवश्यक है फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है। फिर पूजा का संकल्प किया जाता है। संकल्प हर एक पूजा में प्रधान होता है।

संकल्प - आप हाथ में अक्षत लें, पुष्प और जल ले लीजिए। कुछ द्रव्य भी ले लीजिए। द्रव्य का अर्थ है कुछ धन। ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों। सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। उसके बाद वरुण पूजा यानी कलश पूजन करनी चाहिए।

हाथ में थोड़ा सा जल ले लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए। फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है। हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प ले लीजिए। सोलह माताओं को नमस्कार कर लीजिए और पूजा सामग्री चढ़ा दीजिए।

सोलह माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन होता है। रक्षाबंधन विधि में मौली लेकर भगवान गणपति पर चढ़ाइए और फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिए और तिलक लगा लीजिए। अब आनंदचित्त से निर्भय होकर महालक्ष्मी की पूजा प्रारंभ कीजिए।
1.ॐ श्री सद गुरुदेवाये नम: ...3 bar bole
2.ॐ गं गणपतये नम:
3.!!श्री कुबेर मन्त्र !!
ॐ ह्रीं यक्षाये कुबेराए वैश्रवाणाये धन आकर्षणाये 
सर्वलोका वाशिकराए धन धान्यधि पतये 
धन धान्य समृद्धिम देहि दापय स्वाहा।।
4.!!ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः !!
5.श्री लक्ष्मी ध्यान मन्त्र :
"अरुण कमल संस्था तद्रज: पुंजवर्णा
कर कमल धृतेष्टा भीती युग्माम्बुजा च !
मणि कटक विचित्राकल्प्जालै: 
सकल भुवन माता संततं श्री: श्रियै नम:
श्री लक्ष्मी मंत्र 
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री महालक्ष्म्ये नम: ..3 ya 11 
माला का जाप करे 
और उपरोक्त समस्त मन्त्रों की 11 -11 या अधिक से शुद्ध घी की आहुतियां दे 
देवल दुबलिश (ज्योतिषविद )
मेरठ - Mob. No. 9690507570

Tuesday, 14 October 2014

Mata Rani: ज्वालामुखी मन्त्र :

Mata Rani: ज्वालामुखी मन्त्र :: ज्वालामुखी मन्त्र : >>>>>>>>>>>>>> "ॐ श्रीं ह्रीं कलीम सिद्धेश्वरी ज्वालामुखी जृम्भिणि स्त...

ज्वालामुखी मन्त्र :

ज्वालामुखी मन्त्र :
>>>>>>>>>>>>>>
"ॐ श्रीं ह्रीं कलीम सिद्धेश्वरी ज्वालामुखी जृम्भिणि स्तम्भिनी मोहिनी वशीकरणि परधनमोहिनी सर्वारिष्ट निवारणी शत्रु गण संहारणी सुबुद्धि दायनी ओं आं क्रीं ह्रीं त्राहि त्राहि क्षोभय क्षोभय (अमुकं )में वशं कुरु कुरु स्वाहा !!"
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इस मन्त्र को दीपावली की रात्रि से प्रतिदिन 11000 जपे , चमेली पुष्प माता को अर्पित करें, बर्फी का भोग लगाएं तो 21 दिनों में मनोवांछित कार्य सिद्ध होता है ! सावधान- किसी योग्य गुरु अथवा जानकार से विचार विमर्श के पश्चात यह अनुष्ठान सम्पूर्ण करें, योग्यता के आभाव में हानि होने की प्रबल सम्भावना है 

Monday, 8 September 2014

शुभ प्रभात वंदन दोस्तों ....श्राद्ध पक्ष : कैसे मिटेगा पितृ दोष

शुभ  प्रभात वंदन दोस्तों ....श्राद्ध पक्ष : कैसे मिटेगा पितृ दोष
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पितृ यानि हमारे मृत पूर्वजों का तर्पण करवाना हिन्दू धर्म की एक बहुत प्राचीन प्रथा व पर्व है। हिन्दू धर्म में श्राद्ध पक्ष के सोलह दिन निर्धारित किए गए हैं ताकि आप अपने पूर्वजों को याद करें और उनका तर्पण करवा कर उन्हे शांति और तृप्ति प्रदान करें, जिससे आपको उनका आर्शीवाद और सहयोग ‍मिले।

जिस माता, पिता, दादा, दादी, प्रपितामह, मातामही एवं अन्य बुजुर्गों के लाड, प्यार, श्रम से कमाएं धन एवं इज्जत के सहारे आप सुखपूर्वक रहते हैं, तो आज जब उनका शरीर पांच तत्व में विलीन हो गया है तो आपका यह परम कर्तव्य बनता है कि अपने पितरों के लिए कम से कम और कुछ नहीं कर सकते तो तर्पण तो कर दें।

यदि आप अपने ‍माता, पिता, पितामह और परदादा आदि के प्रति असम्मान प्रकट करते हो तथा उनकी इच्छा के विरुद्ध कोई कार्य करते हो तो आपको पितृदोष को झेलना ही होगा।


पितृ दोष दो तरह के होते हैं 1. वंशानुगत, 2. अवंशानुगत। यदि आपने उनके प्रति कोई अपराध किया है तो आपको निम्न में से एक या सभी तरह के कष्ट होंगे।
1.वंशानुगत : किसी भी प्रकार का शारीरिक अपंगता, रोग या मानसिक विकार आनुवांशिक हो सकता है।

- अर्थात वंश क्रम में कोई रोग या अवांछनीय गतिविधि होती चली आ रही हो। इस वंशानुगत दोष को दूर करने के लिए आयुर्वेद और अथर्ववेद में लिखे उपाय किए जाते हैं।
2. अवंशानुगत : अवंशानुगत का अर्थ है कि पितृ लोक के पितृ आपके धर्म-कर्म से रुष्ठ हैं इसलिए उनके कारण आपके जीवन में तरह-तरह के कष्ट होते रहते हैं जैसे : -

1. संतान बाधा : या तो संतान नहीं होगी, लेकिन यदि संतान है तो संतान से कष्ट बना रहता है।

2. विवाह बाधा : यदि कुल-खानदान में कोई पुत्र है तो उसके अविवाहित बने रहने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
3. स्वास्थ्य बाधा : परिवार में किसी अदृश्य एवं चिकित्सकों की पहुंच से बाहर का कोई रोग हो। पूरा इलाज होने के बावजूद रोग ठीक नहीं होता हो।

4. पारिवारिक बाधा : गृह कलह से मानसिक शांति भंग हो जाती है। पूरा परिवार बिखर जाता है। परिवार के किसी भी सदस्य की आपस में नहीं बनती। सभी एक-दूसरे का अपमान करते हैं। रिश्तेदारी से भी सभी दूर हो जाते हैं।

5. अर्थ बाधा : लगातार आर्थिक नुकसान होता रहता है। व्यक्ति का धंधा, नौकरी और कारोबार नहीं चलता।
पितृदोष से मुक्ति का उपाय***********
वेदानुसार यज्ञ पांच प्रकार के होते हैं -

(1) ब्रह्म यज्ञ (2) देव यज्ञ (3) पितृ यज्ञ (4) वैश्वदेव यज्ञ (5) अतिथि यज्ञ।

उक्त पांच यज्ञों को पुराणों और अन्य ग्रंथों में विस्तार से दिया गया है। उक्त पांच यज्ञ में से ही एक यज्ञ है पितृ यज्ञ। इसे पुराण में श्राद्ध कर्म की संज्ञा दी गई है।

पूर्वजों के कार्यों के फलस्वरूप आने वाली पीढ़ी पर पड़ने वाले अशुभ प्रभाव को पितृ दोष कहते हैं।
पितृ दोष का अर्थ यह नहीं कि कोई पितृ अतृप्त होकर आपको कष्ट दे रहा है। पितृ दोष का अर्थ वंशानुगत, मानसिक और शारीरिक रोग और शोक भी होते हैं।

घर और बाहर जो वायु है वह सभी पितरों को धूप, दीप और तर्पण देने से शुद्ध और सकारात्मक प्रभाव देने वाली बन जाती है। इस धूप, श्राद्ध और तर्पण से पितृलोक के तृप्त होने से पितृ दोष मिटता है।

पितरों के तृप्त होने से पितर आपके जीवन के दुखों को मिटाने में सहयोग करते हैं। पितृ यज्ञ और पितृ दोष एक वैज्ञानिक धारणा है।

Wednesday, 20 August 2014

अघोरी एवं अघोर साधना : कुछ अनछुए तथ्य

अघोरी एवं अघोर साधना : कुछ अनछुए तथ्य 

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शैव संप्रदाय में साधना की एक रहस्यमयी शाखा है अघोरपंथ। अघोरी की कल्पना की जाए तो श्मशान में तंत्र क्रिया करने वाले किसी ऐसे साधु की तस्वीर जेहन में उभरती है जिसकी वेशभूषा डरावनी होती है। घोरियों के वेश में कोई ढोंगी आपको ठग सकता है लेकिन अघोरियों की पहचान यही है कि वे किसी से कुछ मांगते नहीं है और बड़ी बात यह कि तब ही संसार में दिखाई देते हैं जबकि वे पहले से नियुक्त श्मशान जा रहे हो या वहां से निकल रहे हों। दूसरा वे कुंभ में नजर आते हैं।

अघोरी को कुछ लोग ओघड़ भी कहते हैं। अघोरियों को डरावना या खतरनाक साधु समझा जाता है लेकिन अघोर का अर्थ है +घोर यानी जो घोर नहीं हो, डरावना नहीं हो, जो सरल हो, जिसमें कोई भेदभाव नहीं हो। कहते हैं कि सरल बनना बड़ा ही कठिन होता है। सरल बनने के लिए ही अघोरी कठिन रास्ता अपनाते हैं। साधना पूर्ण होने के बाद अघोरी हमेशा- हमेशा के लिए हिमालय में लीन हो जाता है।

जिनसे समाज घृणा करता है अघोरी उन्हें अपनाता है। लोग श्मशान, लाश, मुर्दे के मांस कफन आदि से घृणा करते हैं लेकिन अघोर इन्हें अपनाता है। अघोर विद्या व्यक्ति को ऐसा बनाती है जिसमें वह अपने-पराए का भाव भूलकर हर व्यक्ति को समान रूप से चाहता है, उसके भले के लिए अपनी विद्या का प्रयोग करता है।

अघोर विद्या सबसे कठिन लेकिन तत्काल फलित होने वाली विद्या है। साधना के पूर्व मोह-माया का त्याग जरूरी है। मूलत: अघोरी उसे कहते हैं जिसके भीतर से अच्छे-बुरे, सुगंध-दुर्गंध, प्रेम-नफरत, ईर्ष्या-मोह जैसे सारे भाव मिट जाएं। सभी तरह के वैराग्य को प्राप्त करने के लिए ये साधु श्मशान में कुछ दिन गुजारने के बाद पुन: हिमालय या जंगल में चले जाते हैं।

अघोरी खाने-पीने में किसी तरह का कोई परहेज नहीं नहीं करता। रोटी मिले तो रोटी खा लें, खीर मिले खीर खा लें, बकरा मिले तो बकरा और मानव शव मिले तो उससे भी परहेज नहीं। यह तो ठीक है अघोरी सड़ते पशु का मांस भी बिना किसी हिचकिचाहट के खा लेता है। अघोरी लोग गाय का मांस छोड़कर बाकी सभी चीजों का भक्षण करते हैं। मानव मल से लेकर मुर्दे का मांस तक।
घोरपंथ में श्मशान साधना का विशेष महत्व है। अघोरी जानना चाहता है कि मौत क्या होती है और वैराग्य क्या होता है। आत्मा मरने के बाद कहां चली जाती है? क्या आत्मा से बात की जा सकती है? ऐसे ढेर सारे प्रश्न है जिसके कारण अघोरी श्मशान में वास करना पसंद करते हैं। मान्यता है कि श्मशान में साधना करना शीघ्र ही फलदायक होता है। श्मशान में साधारण मानव जाता ही नहीं, इसीलिए साधना में विघ्न पड़ने का कोई प्रश्न नहीं।

अघोरी मानते हैं कि जो लोग दुनियादारी और गलत कामों के लिए तंत्र साधना करते हैं अंत में उनका अहित ही होता है। श्मशान में तो शिव का वास है उनकी उपासना हमें मोक्ष की ओर ले जाती है।

अघोरी श्मशान में कौन-सी साधना करते हैं...अघोरी श्मशान घाट में तीन तरह से साधना करते हैं- श्मशान साधना, शव साधना और शिव साधना।

शव साधना : मान्यता है कि इस साधना को करने के बाद मुर्दा बोल उठता है और आपकी इच्छाएं पूरी करता है

शिव साधना में शव के ऊपर पैर रखकर खड़े रहकर साधना की जाती है। बाकी तरीके शव साधना की ही तरह होते हैं। इस साधना का मूल शिव की छाती पर पार्वती द्वारा रखा हुआ पांव है। ऐसी साधनाओं में मुर्दे को प्रसाद के रूप में मांस और मदिरा चढ़ाया जाता है।

शव और शिव साधना के अतिरिक्त तीसरी साधना होती है श्मशान साधना, जिसमें आम परिवारजनों को भी शामिल किया जा सकता है। इस साधना में मुर्दे की जगह शवपीठ की पूजा की जाती है। उस पर गंगा जल चढ़ाया जाता है। यहां प्रसाद के रूप में भी मांस-मंदिरा की जगह मावा चढ़ाया जाता है।

भूत-पिशाचों से बचने के लिए क्या करते हैं अघोरी...

अघोरियों के पास भूतों से बचने के लिए एक खास मंत्र रहता है। साधना के पूर्व अघोरी अगरबत्ती, धूप लगाकर दीपदान करता है और फिर उस मंत्र को जपते हुए वह चिता के और अपने चारों ओर लकीर खींच देता है। फिर तुतई बजाना शुरू करता है और साधना शुरू हो जाती है। ऐसा करके अघोरी अन्य प्रेत-पिशाचों को चिता की आत्मा और खुद को अपनी साधना में विघ्न डालने से रोकता है।

क्यों जिद्दी और गुस्सैल होते हैं अघोरी...
अघोरियों के बारे में मान्यता है कि वे बड़े ही जिद्दी होते हैं। अगर किसी से कुछ मांगेंगे, तो लेकर ही जाएंगे। क्रोधित हो जाएंगे तो अपना तांडव दिखाएंगे या भला-बुरा कहकर उसे शाप देकर चले जाएंगे। एक अघोरी बाबा की आंखें लाल सुर्ख होती हैं लेकिन अघोरी की आंखों में जितना क्रोध दिखाई देता हैं बातों में उतनी ही शीतलता होती है।

अघोरी की वेशभूषा...
कफन के काले वस्त्रों में लिपटे अघोरी बाबा के गले में धातु की बनी नरमुंड की माला लटकी होती है। नरमुंड हो तो वे प्रतीक रूप में उसी तरह की माला पहनते हैं। हाथ में चिमटा, कमंडल, कान में कुंडल, कमर में कमरबंध और पूरे शरीर पर राख मलकर रहते हैं ये साधु। ये साधु अपने गले में काली ऊन का एक जनेऊ रखते हैं जिसे 'सिले' कहते हैं। गले में एक सींग की नादी रखते हैं। इन दोनों को 'सींगी सेली' कहते है।

अघोरपंथ तांत्रिकों के तीर्थस्थल...
अघोरपंथ के लोग चार स्थानों पर ही श्मशान साधना करते हैं। चार स्थानों के अलावा वे शक्तिपीठों, बगलामुखी, काली और भैरव के मुख्य स्थानों के पास के श्मशान में साधना करते हैं। यदि आपको पता चले कि इन स्थानों को छोड़कर अन्य स्थानों पर भी अघोरी साधना करते हैं तो यह कहना होगा कि वे अन्य श्मशान में साधना नहीं करते बल्कि यात्रा प्रवास के दौरान वे वहां विश्राम करने रुकते होंगे या फिर वे ढोंगी होंगे।

तीन प्रमुख स्थान :

1.
तारापीठ का श्मशान : कोलकाता से 180 किलोमीटर दूर स्थित तारापीठ धाम की खासियत यहां का महाश्मशान है। वीरभूम की तारापीठ (शक्तिपीठ) अघोर तांत्रिकों का तीर्थ है। यहां आपको हजारों की संख्या में अघोर तांत्रिक मिल जाएंगे। तंत्र साधना के लिए जानी-मानी जगह है तारापीठ, जहां की आराधना पीठ के निकट स्थित श्मशान में हवन किए बगैर पूरी नहीं मानी जाती। कालीघाट को तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है

कालीघाट में होती हैं अघोर तांत्रिक सिद्धियां

2.
कामाख्या पीठ के श्मशान : कामाख्या पीठ भारत का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो असम प्रदेश में है। कामाख्या देवी का मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। प्राचीनकाल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र-सिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। कालिका पुराण तथा देवीपुराण में 'कामाख्या शक्तिपीठ' को सर्वोत्तम कहा गया है और यह भी तांत्रिकों का गढ़ है।

3.
रजरप्पा का श्मशान : रजरप्पा में छिन्नमस्ता देवी का स्थान है। रजरप्पा की छिन्नमस्ता को 52 शक्तिपीठों में शुमार किया जाता है लेकिन जानकारों के अनुसार छिन्नमस्ता 10 महाविद्याओं में एक हैं। उनमें 5 तांत्रिक और 5 वैष्णवी हैं। तांत्रिक महाविद्याओं में कामरूप कामाख्या की षोडशी और तारापीठ की तारा के बाद इनका स्थान आता है।

4.
चक्रतीर्थ का श्मशान : मध्यप्रदेश के उज्जैन में चक्रतीर्थ नामक स्थान और गढ़कालिका का स्थान तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। उज्जैन में काल भैरव और विक्रांत भैरव भी तांत्रिकों का मुख्य स्थान माना जाता है।